US आर्मी का सीक्रेट मिशन जिसने पश्चिम एशिया में लिखी शांति की पटकथा, खत्म कराई 72 साल पुरानी दुश्मनी

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हाइलाइट्स:

  • अमेरिकी सेना ने सीक्रेट मिशन के जरिए यमन से बचाया था यूएई के शाही परिवार का एक सदस्य
  • क्राउन प्रिंस के दामाद का हेलिकॉप्टर अलकायदा के आतंकियों के साथ मुठभेड़ में हो गया था क्रैश
  • इस मिशन को लॉन्च करने वाले अमेरिकी जनरल के कहने पर इजरायल के साथ शांति समझौते को तैयार हुआ था यूएई

वॉशिंगटन
इजरायल और यूएई के बीच अगस्त में जब शांति समझौते का ऐलान हुआ तो पूरी दुनिया अचंभित हो गई थी। कई बड़े रणनीतिक जानकारों ने अमेरिकी मध्यस्थता को लेकर संदेह जारी किया था। 72 साल से एक दूसरे के कट्टर विरोधी और धार्मिक रूप से भी विपरीत ध्रुव के दो देशों के बीच अचानक दोस्ती की खबर ने दुनिया में हलचल मचा दी थी। अब खुलासा हुआ है कि आखिर कैसे अमेरिका ने इन दो देशों को दोस्ती की मेज पर बैठाया और यह डील कराई।

यूएस आर्मी के खुफिया मिशन ने खत्म कराई दुश्मनी
अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते के पीछे अमेरिकी सेना का एक खुफिया बचाव मिशन है। जिसने 72 साल पुराने दो दुश्मनों के बीच दोस्ती करवाई है। 11 अगस्त, 2017 को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सेना यमन में अलकायदा के आतंकवादियों के खिलाफ एक मिशन लॉन्च किया था। इस दौरान उसका एक हेलिकॉप्टर दुश्मनों के इलाके में क्रैश हो गया।

अमेरिकी सेना ने लॉन्च किया रेस्क्यू मिशन
इस हादसे में यूएई के तीन सैनिक मारे गए, जबकि सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल हुए सैनिकों में यूएई शाही परिवार का एक सदस्य भी शामिल था। यूएई के शाही परिवार को जैसे ही इसका पता चला उन्होंने अमेरिका से एक रेस्क्यू मिशन लॉन्च करने का आग्रह किया। कुछ ही घंटों में अमेरिकी सेना के जांबाज कमांडो का एक दस्ता यमन में यूएई के घायल जवानों को बचाने के लिए रवाना हो गया।

अमेरिका ने बचाया शाही परिवार का प्रमुख सदस्य
अमेरिकी सेना के कमांडो दस्ते ने भीषण लड़ाई के बाद न केवल शाही परिवार से सदस्य को बचाया, बल्कि युद्धक्षेत्र में फंसे यूएई के बाकी सैनिकों को भी वहां से सुरक्षित निकाल लिया। हालांकि, आजतक अमेरिका और यूएई की सरकार ने यह स्वीकार नहीं किया है कि उस मिशन में शाही परिवार के किसी सदस्य को बताया गया था। इसी मिशन के कारण यूएई अमेरिका के कहने पर इजरायल के साथ शांति समझौते के लिए राजी हुआ।

वाइट हाउस के स्पेशल एडवाइजर हैं जनरल कोर्रा
इस बचाव अभियान का नेतृत्व अमेरिकी मेजर जनरल मिगेल कोर्रा कर रहे थे। वर्तमान में वे वॉशिंगटन में वाइट हाउस के स्पेशल एडवाइजर और खाड़ी में अमेरिकी नीति के लिए शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस घटना के समय जनरल कोर्रा यूएई के अमेरिकी दूतावास में डिफेंस अटैशे के रूप में तैनात थे। इस रेस्क्यू मिशन के सफल निर्देशन के कारण अमीराती नेताओं के बीच जनरल कोर्रा एक हीरो की तरह मशहूर थे।

US Army 012

अमेरिकी सेना ने क्राउन प्रिंस के दामाद को बचाया था
उन्होंने शाही परिवार के जिस सदस्य को यमन से बचाया, वह यूएई के शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का भतीजा और दामाद थे। जनरल कोर्रा की इस साहसिक मिशन के कारण ही यूएई के नेता इजरायल के साथ दोस्ती के लिए बिना शर्त तैयार हो गए। खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह चाहते थे कि वे इजरायल और यूएई के बीच शांति समझौते को एक बड़ी सफलता के रूप में प्रचारित करें। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।

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यूएई के विदेश मंत्री ने जनरल को बताया परिवार का सदस्य
वाशिंगटन के वाइट हाउस में जब 15 सितंबर को इजरायल और यूएई के बीच अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए तो मौके पर मौजूद अमीराती विदेश मंत्री ने जनरल कोर्रा की खुलेआम तारीफ की। यूएई क्राउन प्रिंस के चचेरे भाई और 2017 में बचाए गए यूएई के शाही परिवार के सदस्य के चाचा अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि जनरल कोर्रा मेरे परिवार के एक सदस्य हैं। उनके बिना ऐसा नहीं हो पाता।


इन्होंने निभाई समझौते में बड़ी भूमिका
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष सलाहकार और दामाद जेरेड कुशनर, उनके सलाहकार एवी बेरकोविट्ज, अमेरिका में यूएई के राजदूत यूसेफ ओतिबा प्रमुख रूप से इस समझौते के पीछे सक्रिय रहे। इसके अलावा खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात की थी।



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